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बिलासपुर।राज्य के स्कूलों में जल्द ही बच्चे कंचा,लट्टू और पिट्टूल खेलते नजर आएंगे।राज्य शासन ने छत्तीसगढ़ के परांपरागत खेलों को बढ़ावा देने के लिए यह पहल की है।प्रदेश के परांपरागत खेलों से बच्चे दूर हो गए हैं।ऐसे में उन्हें अपनी परंपरा से जोड़ने और उनकी शारीरिक व मानसिक क्षमता बढ़ाने के लिए शासन ने नई पहल की है।इसके तहत सभी जिले के स्कूल शिक्षा विभाग को प्राथमिक स्कूल और पूर्व माध्यमिक स्कूल के बच्चों को परंपरागत खेल सिखाने के निर्देश दिए गए हैं।इन खेलों के लिए आवश्यक सामग्री की जल्द ही खरीदी जाएगी।योजना के तहत 30 से ज्यादा खेल को शामिल किया गया है।बच्चों की उम्र के अनुसार अलग-अलग खेल सिखाए जाएंगे।इस योजना के क्रियान्वयन के लिए शासन ने स्कूलों के खाते में रुपये भी डाल दिए हैं।इसमें प्राथमिक स्कूल के लिए तीन हजार रुपये और पूर्व माध्यमिक स्कूल के लिए पांच हजार रुपये दिए गए हैं।इस राशि से जल्द ही खेल सामग्री खरीदी जाएगी।खेल सामग्री की खरीदी स्कूल समिति के माध्यम से होगी।इसमें संस्था प्रमुख अध्यक्ष होंगे।समिति में दो बच्चों के साथ एक वरिष्ठ शिक्षक और एक खेल सामग्री के जानकार को जगह दी जाएगी।इनकी मौजदूगी में परंपरागत खेलों से संबंधित खेल सामग्री खरीदी पर निर्णय होगा।

इन खेलों में होंगे पारंगत

प्राथमिक स्कूलः कंचा,पंजा लड़ाना,पिट्टूल,पतंगबाजी,लट्टू, गिल्ली डंडा,रस्साकसी,चक्का,दौड़,गोला फेंक,तवा फेंक,मलखंभ,जूडो, योग,बोरा दौड़,गे़ंडी,कैरम आदि।

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