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रायपुर|छत्तीसगढ़ सहायक शिक्षक फेडरेशन के संकुल,ब्लाक,जिला और संभाग के पदाधिकारियों के साथ प्रदेश के 1 लाख 9 हजार सहायक शिक्षकों ने सामूहिक रूप से जाकेश साहू को बर्खास्त कर दिया है|सभी का कहना है कि-फेडरेशन का उदय सिर्फ हमारी माँगो को पूरा करने के लिए हुआ है,हमने इसका आरम्भ सामूहिक नेतृत्व से किया था,पर समय के साथ एक स्वयंभू प्रांताध्यक्ष पद के लालची व्यक्ति ने रातों-रात अपने आपको प्रांताध्यक्ष घोषित करके खुद को सर्वेसर्वा समझ बैठा और फेडरेशन के कई सम्मानीय प्रान्तीय संयोजकों के ऊपर झूठ-मुठ का मनगढ़ंत आरोप लगाकर,उनकी प्रतिष्ठित छवि को धूमिल करने की कुचेष्टा की और जब प्रदेश भर के साथियों का विरोध चालू हुआ,तो वही व्यक्ति रोते गिड़गिड़ाते माफी मांग कर वापस आ गया|जिस पर तरस खाकर हमारे जिलाध्यक्षों ने उन्हें पुनः फेडरेशन में शामिल कराया,यही हमारी भूल है|क्योंकि वह व्यक्ति मात्र कुछ दिन ही चुप रहा,इसके बाद फिर से उनके सोशल मीडिया में अपनी उलजुलूल हरकत शुरू कर दी और प्रान्तीय निर्णय के विरुद्ध मैसेज डालकर,मनमाने तरीके से फेडरेशन को चलाने की कोशिश करने लगा|

जिस पर अंकुश लगाने के लिए 3 मार्च को रायपुर में बैठक बुलाई गई,जिसका मैसेज वह खुद भेजकर गायब हो गया|यह वही आदमी है जिसने पुलावामा के शहीदों को श्रद्धांजलि देने के कार्यक्रम के कारण प्रान्तीय बैठक के साथ फेडरेशन की सारी गतिविधि को निरस्त करवाया और जब पूरे प्रदेश भर में अमर जवानों को श्रद्धांजलि दी जा रही थी,तो वह अपने घर में आराम फरमा रहा था और पूरे प्रदेश में खुद समाचार बनाकर वाहवाही लेना चाह रहा था|जब पूरा फेडरेशन 2 मार्च को पूरे 27 ज़िलों में 7% DA और राजपत्र में प्रकाशन के लिए जिला कलेक्टर को ज्ञापन दे रहा था,तो ये फिर गायब रहा और राजनांदगांव के ज्ञापन कार्यक्रम से गायब रहकर घर में बैठकर झूठी वाहवाही लूटने के लिए,अपने नाम को प्रमुखता से रखकर,पूरे प्रदेश में समाचार परोसा|ऐसे ही 3 मार्च की बैठक आहूत करके गायब हो गया और जब उपस्थित जिलाध्यक्षों ने इसकी करतूत को रोकने के लिए अंतरिम व्यवस्था के तहत 1 वर्ष के लिए प्रत्यक्ष चुनाव कराकर एक सशक्त कार्यकारिणी बनाई,तो इसके प्रांताध्यक्ष बनने की महत्वाकांक्षा धूमिल होने लगी और इसने लोगों को whatsapp के माध्यम से गुमराह करने की कोशिश की और विरोध भी शुरू कर दिया|साथ ही अपने एक साथी के माध्यम से सोशल मीडिया में प्रांताध्यक्ष बनने के लिए वोटिंग पोल चालू की,जिसमें बमुश्किल 500 लोगों को वोट कराकर,अपने आप को प्रांताध्यक्ष घोषित किया और फेडरेशन के सहीं पदाधिकारियों को पदांकित करके,स्वयं फेडरेशन पर दावा कर रहा है,जिसे कुछ विरोधी तत्व जिन्हें सिर्फ नेतागिरी से ही मतलब है न कि वर्ग-3 की मांगों से,एक षड़यंत्र के तहत साथ देने लगे|कुछ लोगों ने 3 मार्च को चुनाव पर नराजगी भी ज़ाहिर की,जो जायज है|क्योंकि वे उस चुनाव का हिस्सा बनने से चूक गए,पर उन साथियों को बताना चाहेंगे कि-यह चुनाव वैकल्पिक है,न कि स्थायी|फिर भी लोग मुँह फुलाये बैठे हैं,ऐसे लोगों से फेडरेशन पूछना चाहता है कि-अभी पंजीयन ऑफिस के अनुसार न तो लोग विधिवत फेडरेशन के सदस्य बने हैं,न ही मतदाता सूची बनी है,न ही सदस्यों का नाम पंजीयन आफिस में जमा किया गया है|ऐसे में नियमावली के अनुसार चुनाव सम्भव नही था,इसीलिए जिलाध्यक्षों ने 1 वर्ष की व्यवस्था बनाई, ताकि संघ का काम व्यवस्थित ढंग से चल सके|जिन लोगों को ये रास नहीं आई उन्होंने हर बार की भांति एकबार फिर फेडरेशन की एकता को खंडित करने का काम किया|जिन्हें सामूहिक निर्णय पर भरोसा नहीं,जो अपनी की बातों पर कायम नहीं रह सकता,रोज रोज उलजुलूल बयान देकर लोगो को भ्रमित करता है,वो कभी भी इतने बड़े फेडरेशन का अगुआ नहीं बन सकता|यही कारण है कि-ऐसे लोगों को फेडरेशन से बाहर का रास्ता दिखाया गया है,जो सहीं और सराहनीय कदम है|

बहुत जल्द लोकसभा आम चुनाव के बाद फेडरेशन सदस्यता अभियान चलाकर,सबसे पहले सदस्यों की सूची पंजीयन कार्यालय में देगा,वहीं से चुनाव अधिकारी बुलाकर विधिवत आम लोगों की इच्छानुसार प्रान्त के पदाधिकारियों का चयन किया जाएगा|तब तक के लिए 3 मार्च को घोषित कार्यकारिणी ही अंतरिम रूप से फेडरेशन के सभी कार्यकर्मो का संचालन करेगी।

तब तक सभी को धैर्य रखना होगा,तरह फेडरेशन के 4 सूत्रीय मांगों सहित स्थानीय समस्या और राजपत्र प्रकाशन और क्रमोन्नति सहित एरियर्स की माँगो को पूरा करने के लिए एकजुटता के साथ स्थानीय प्रशासन पर दबाव बनाना होगा|अगर इसके बावजूद चुनाव कराने की बात आई,तो निश्चित ही जिला और ब्लाक वाले,जो पदलोलुपता का इल्जाम प्रान्त वालो पर लगाते हैं,कहीं न कहीं उसके शिकार बन जायेंगे| इसलिए अध्यक्ष,सचिव सहित पदाधिकारियों की खींचतान छोड़कर,अपनी माँग के लिए सजग और सतर्क रहें|कहीं 2011 की भांति इस बार भी क्रमोन्नति का आदेश आपसी खींचतान से 2013 की भांति खत्म कर दिया जाये|इसलिए फेडरेशन के समर्पित सिपाही बने और अपनी मांगों की दिशा में सोचें।

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