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रायपुर|अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर आज अग्रसेन महाविद्यालय-पुरानी बस्ती रायपुर के द्वारा- “समाज के विभिन्न आयामों में महिलाओं की सक्रीय भूमिका” विषय पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया।संगोष्ठी का उद्घाटन करियर काउंसलर व एजुकेशनल साइकोलोजिस्ट -डॉ.वर्षा वरवंडकर ने किया।इस दौरान समाजकार्य विभाग व पत्रकारिता विभाग के छात्र-छात्राओं ने अपना विचार व्यक्त किया।डॉ.वर्षा वरवंडकर ने अपने संबोधन में कहा कि-महिलाएं समाज का बीज है|महिलाएं कोमलता की प्रतीक है|साथ ही उन्होंने कहा कि-शहरी महिलाओं की तुलना में ग्रामीण महिलाएं आर्थिक मामले में ज़्यादा सशक्त है|73 प्रतिशत महिलाए माँ बनने के बाद अपना काम बंद कर देती है|इसके अलावा “बेटी बचाओं,बेटी पढ़ाओं”योजना के बारे में कहा कि-इस योजना के आने से साक्षरता में 65 प्रतिशत वृद्धि तो हुई है,मगर 2015 की तुलना में श्रम शक्ति 15 प्रतिशत घटी है|महिलाओं को मानसिक व आर्थिक रूप से सशक्त होना ज़रूरी है|महिला दिवस की सार्थकता तभी बदली जा सकती है,जब सोच को बदली जाए||सिर्फ कमाना ही आर्थिक भागीदारी नहीं है|स्वतंत्रता की बात करना,स्वछंदता की बात न करना|

इसके अलावा उन्होंने हिंदी भाषा को लेकर कहा कि-20 साल बाद उनको तभी काम में रखा जायेगा,जब उनकी हिंदी अच्छी होगी|महाविद्यालय के निदेशक-डॉ.वी.के.अग्रवाल ने कहा कि-नारियों में सकारात्मक गुण पुरुषों के बजाय ज़्यादा होता है|स्वालम्बन उसकी आधारभूत आवश्यकता है|नारी परिवार को जोड़ने में अपना महत्वपूर्ण योगदान देती है|इस अवसर पर महाविद्यालय के निदेशक-डॉ.वी.के.अग्रवाल,प्राचार्य डॉ. वाय.के.राजपूत,प्रशासनिक अधिकारी-अमित अग्रवाल,प्रो.डॉ.डॉली पांडे,प्रो.कविता अग्रवाल,पत्रकारिता विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ.आकांक्षा दुबे व अन्य प्रोफेसर सहित छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे|

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